मुख्य बिंदु

✦ मुख्य बिंदु

  • बगलामुखी जयंती वैशाख शुक्ल अष्टमी — हिंदू माह वैशाख के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि — को पड़ती है।
  • 2026 में बगलामुखी जयंती बुधवार, 6 मई 2026 को है।
  • यह दिन हरिद्रा सरोवर से माँ बगलामुखी के दिव्य प्राकट्य का स्मरण कराता है।
  • यह वर्ष का एकमात्र सर्वाधिक शक्तिशाली दिन माना जाता है — बगलामुखी मंत्र, हवन और पूजा के लिए।
  • दतिया (म.प्र.) स्थित पीतांबरा पीठ, कांगड़ा (हि.प्र.) स्थित बगलामुखी पीठ और नलखेड़ा (म.प्र.) में भव्य उत्सव मनाया जाता है।
  • व्रत, पीत वस्त्र, हल्दी का अर्पण और हवन — ये इस दिन के आचरण के चार स्तंभ हैं।
  • इस दिन की एक भी सच्ची पूजा पूरे वर्ष की नियमित उपासना के समान आध्यात्मिक फल देती है, ऐसा मान्यता है।

आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और उत्पत्ति कथा

बगलामुखी जयंती की उत्पत्ति माँ बगलामुखी की प्रकट्य कथा से अभिन्न रूप से जुड़ी है।

देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक प्राचीन सृष्टि काल में अपूर्व शक्ति वाला एक भयंकर तूफान उठा जो समस्त सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता रखता था। महासागर अपनी सीमाएं तोड़ रहे थे। आकाश अंधकार में डूब गया था। समस्त प्राणी विनाश की कगार पर थे। भगवान विष्णु और समस्त देवगण इस प्रलय के सामने असहाय होकर सौराष्ट्र की पवित्र भूमि में हरिद्रा सरोवर — हल्दी के दिव्य सरोवर — पर एकत्रित हुए।

उन्होंने पूर्ण समर्पण के साथ आदिशक्ति की तीव्र तपस्या की और उनसे प्रार्थना की। उनकी आर्त पुकार परम माता तक पहुँची। प्रत्युत्तर में हरिद्रा सरोवर के पीत जल से एक दीप्तिमान सुनहरा स्वरूप प्रकट हुआ। इस स्वरूप से परम स्थिरता और अतुलनीय शक्ति की ऊर्जा प्रवाहित हो रही थी। जैसे ही वे प्रकट हुईं, वह भयंकर तूफान पूर्णतः स्तंभित हो गया। महासागर शांत हो गए। सृष्टि की रक्षा हुई।