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बगलामुखी आरती

(जय बगलामुखी माता...)

प्रस्तावना

माँ पीताम्बरा बगलामुखी की यह सुन्दर आरती सम्पूर्ण पूजा, जप और स्तोत्र पाठ के बाद की जाती है। आरती के गान से माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी असीम कृपा बनाए रखती हैं।

1

जय बगलामुखी माता, जय बगलामुखी माता। सब दुष्टों का नाश करो, भक्तों की रखवाली माता॥ जय...॥

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2

पीतवर्ण तव रूप सुहाना, पीत वसन तन सोहे। पीत पुष्प चढ़ावत भक्त, मन में आनन्द होवे॥ जय...॥

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3

हाथ मुद्गर दण्ड विराजे, शत्रु जिह्वा पकड़े। दुष्ट जनों को दण्ड देत हो, भक्त सदा निर्भय रहें॥ जय...॥

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4

स्तम्भिनी तू शक्ति अपार है, त्रिभुवन में तेरी जय हो। ह्लीं बीज मन्त्र तव महिमा, जप करत सब सिद्धि होय॥ जय...॥

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5

ब्रह्मा विष्णु महेश पुजारी, देवगण गावत तेरो। सरस्वती लक्ष्मी तव दासी, मातु! चरण मन मेरो॥ जय...॥

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6

आरती करत भक्त तव द्वारे, पाप सभी हर लेना। बगलामुखी माँ! कृपा करो, शरण तुम्हारी लेना॥ जय...॥

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7

जय बगलामुखी माता, जय बगलामुखी माता। सब दुष्टों का नाश करो, भक्तों की रखवाली माता॥

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स्रोत: मन्दिर प्रामाणिक पाठ

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