बगलामुखी चालीसा
(श्री बगला चरणन नमूँ...)
प्रस्तावना
माँ बगलामुखी को समर्पित ४० छंदों की यह भक्तिमयी स्तुति अत्यंत प्रभावकारी है। इसके नियमित पाठ से जीवन के सारे कष्ट, दरिद्रता और शत्रुओं का भय तत्क्षण समाप्त हो जाता है।
श्री बगला चरणन नमूँ, हरती दुःख अपार। स्तम्भन शक्ति अपार है, करो जगत् उद्धार॥
जय जय बगलामुखी भवानी। जय स्तम्भिनि जग-विख्यानी॥
पीतवर्ण तव रूप मनोहर। त्रिभुवन में तुम हो अति सुन्दर॥
पीत वसन तन दिव्य सजाया। पीत पुष्पन से मन हरषाया॥
स्वर्ण सिंहासन पर विराजो। ह्लीं बीजेश्वरि! नित्य विराजो॥
तीन नेत्र तव ज्योति अपारा। दसों दिशा में उजियारा॥
मुद्गर हाथ में शोभित भारी। शत्रु दलन करो महतारी॥
दुष्ट जिह्वा पकड़ि तुम लेहू। भक्तन को अभयदान देहू॥
वाक् स्तम्भन तव लीला न्यारी। मौन करो दुष्टन की वाणी॥
बुद्धि स्तम्भन शक्ति तुम्हारी। विपदा हरो जगत की सारी॥
मन स्तम्भन करो हे माता। शत्रु चेतना हो नहिं ज्ञाता॥
हरिद्रा वर्ण तव धाम सुहाना। सौभाग्य सदा भक्तन पाना॥
दश महाविद्या में तुम आठवीं। शक्ति अनन्त तुम्हारी साठवीं॥
सतयुग में जब संकट आया। तुमने जगत् को तब बचाया॥
हरिद्रा सरोवर से प्रकटीं। भक्तन की पीड़ा तब घटीं॥
विष्णु ने किया तुम्हें जागृत। जगत रक्षार्थ हुईं तुम उद्यत॥
ब्रह्मास्त्र तुल्य है जप तुम्हारा। पल में करो रिपु का संहारा॥
नव दुर्गा में तुम्हीं विशेषा। करो सदा भक्तन की रक्षा॥
सर्प विष भी तुमसे जाता। रोग दोष सब दूर हो जाता॥
कोर्ट कचहरी में जो जाता। तव कृपा से विजय पाता॥
वाद-विवाद में तुम सहाई। शत्रु की वाणी हो निरुपाई॥
राजद्वारे तव नाम सहारा। भक्त को मिलता मान अपारा॥
ग्रह पीड़ा जो सताए भारी। तव स्मरण से हो वो टारी॥
शनि राहु केतु दोष निवारो। भक्तन का कल्याण सम्हारो॥
तन्त्र मन्त्र का भय नहिं रहता। जो तव चरणन ध्यान धरता॥
अभिचार से रक्षा करो माँ। काल भय से भी तारो माँ॥
ह्लीं ह्लीं जपत जो नर नारी। होत सिद्ध कारज सब सारी॥
पीत धोती पीत माला पहिरो। पीत पुष्प चढ़ाय मन हरो॥
हल्दी अर्पण करो जो भाई। माँ बगला प्रसन्न हो जाई॥
नित्य चालीसा जो नर गावे। बगला कृपा अपार वो पावे॥
सप्त जन्म के पाप नशावे। मोक्ष द्वार तक भक्त पहुँचावे॥
शत्रु सेना जो घेरे आई। एक पाठ में करो विदाई॥
युद्ध क्षेत्र में जो तुम्हें स्मरे। विजयश्री उसके गले परे॥
व्यापार में जो ठगा जाता। तव कृपा से धन पाता॥
सन्तान हीन जो दुखी होई। तव चरण धरे सन्तान होई॥
विद्यार्थी जो ध्यान धरे तुम्हारा। बुद्धि विवेक हो उजियारा॥
परीक्षा में जो जपे तुम्हारा। सफलता मिले अति प्यारा॥
दारिद्र्य दुख दूर होई जाई। लक्ष्मी आई घर में छाई॥
भूत प्रेत का भय नहिं रहता। जो तव नाम निरन्तर कहता॥
जो श्रद्धा से आरती गावे। चालीसा पढ़ मन हरषावे॥
बगला माँ की जय जय होवे। भक्त सदा आनन्द में सोवे॥
बगलामुखी चालीसा पढ़े, श्रद्धा धरि चित लाय। दुख दारिद्र्य शत्रु भय, सब नाशे तत्काय॥ सवैया - इति श्री बगलामुखी चालीसा सम्पूर्णम्।
स्रोत: मन्दिर प्रामाणिक पाठ
