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सम्पूर्ण बगलामुखी पूजा विधि

माँ पीताम्बरा की प्रामाणिक साधना एवं उपासना विधि

प्रामाणिक प्रक्रिया
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प्रथम भाग — सामग्री एवं तैयारी

माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। इसलिए अधिकतम सामग्री पीले रंग की होनी चाहिए।

आवश्यक पूजन सामग्री:

  • हल्दी की गाँठ एवं पिसी हुई हल्दी
  • पीले फूल (गेंदा, कनेर, चम्पा, सूर्यमुखी)
  • पीला वस्त्र (आसन और स्वयं पहनने के लिए)
  • बेसन के लड्डू या कोई पीली मिठाई (भोग के लिए)
  • हल्दी की माला (मन्त्र जाप हेतु - 108 दाने)
  • शुद्ध देसी घी और सरसों का तेल
  • पीला चन्दन, कुमकुम, अक्षत (पीले रंगे हुए चावल)
  • धूप, दीप, कर्पूर
  • पञ्चामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

स्थान एवं दिशा: पूजा एकान्त और पवित्र स्थान पर करें। आपका मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

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द्वितीय भाग — पवित्रीकरण एवं आचमन

अपने बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजन सामग्री पर छिड़कें:

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥

इसके बाद तीन बार जल से आचमन (पीना) करें और हर बार मन्त्र पढ़ें:

१. ॐ केशवाय नमः (जल पिएं) २. ॐ नारायणाय नमः (जल पिएं) ३. ॐ माधवाय नमः (जल पिएं) ४. ॐ हृषीकेशाय नमः (हाथ धो लें)

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तृतीय भाग — सङ्कल्प

दाहिने हाथ में थोड़ा जल, पीले अक्षत, पीला फूल और एक सिक्का लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए सङ्कल्प लें:

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः ... अद्य (अपना नाम) गोत्रोत्पन्नः (अपना गोत्र) अहं मम शत्रूणां नाशार्थे, सर्व-विघ्न-निवारणार्थे, वाक्-सिद्धि प्राप्त्यर्थे श्री बगलामुखी देवी पूजनं तथा मन्त्र-जपं करिष्ये।

सङ्कल्प का जल पृथ्वी पर या किसी पात्र में छोड़ दें।

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चतुर्थ भाग — ध्यान एवं आवाहन

हाथ जोड़कर माँ पीताम्बरा का ध्यान करें:

मध्ये सुधाब्धिमणिमण्डपरत्नवेद्यां, सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णाम् । पीताम्बराभरणमाल्यविलेपनाङ्गीं, देवीं स्मरामि धृतमुद्गरवैरिजिह्वाम् ॥

ध्यान के बाद पीले फूल माँ बगलामुखी के यन्त्र या चित्र पर यह मन्त्र बोलते हुए अर्पित करें:

ॐ आवाहयामि देवि त्वां, पीताम्बर-धरां शुभाम् । आगच्छ भगवति सुरासुर-नमस्कृते ॥ ॐ ह्लीं बगलामुक्यै नमः । आवाहनं समर्पयामि ।

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पञ्चम भाग — पञ्चोपचार पूजन एवं जाप

निम्न 5 वस्तुओं से देवी का पूजन करें:

  • गन्ध (चन्दन/हल्दी): ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः गन्धं समर्पयामि।
  • पुष्प (पीले फूल): ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः पुष्पं समर्पयामि।
  • धूप (अगरबत्ती): ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः धूपं आघ्रापयामि।
  • दीप (घी/सरसों का दीपक): ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः दीपं दर्शयामि।
  • नैवेद्य (पीला भोग/मिठाई): ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः नैवेद्यं निवेदयामि।

हल्दी की माला से निम्न मूल मन्त्र का न्यूनतम 108 बार (1 माला) जाप करें:

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥

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षष्ठ भाग — हवन विधि (Havan Vidhi)

हवन सर्वोत्तम फल देता है। यदि सम्भव हो तो प्रत्येक 11 दिन या मास में एक बार हवन अवश्य करें। हवन कुण्ड वर्गाकार हो — 9×9 इंच न्यूनतम। आम की लकड़ी से कर्पूर द्वारा अग्नि प्रज्वलित करें और निम्न आहुतियाँ दें:

प्राथमिक आहुतिमन्त्र एवं सामग्री
प्रारम्भिकॐ भूः स्वाहा | ॐ भुवः स्वाहा | ॐ स्वः स्वाहा (केवल घी - 3 बार)
गायत्रीॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं... स्वाहा (घी + सामग्री - 11 बार)
गणेशॐ गं गणपतये नमः स्वाहा (घी + मोदक - 11 बार)
मुख्य मन्त्रॐ ह्लीं बगलामुखि...स्वाहा (घी + पीली सरसों/हल्दी - 108 बार)
पूर्णाहुतिॐ सर्वाभ्यो देवताभ्यो स्वाहा (नारियल + घी - 1 बार)
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सप्तम भाग — कवच एवं स्तुति

हवन के पश्चात् या नित्य पूजा में बगलामुखी कवच का पाठ करें। यह सर्व बाधाओं से रक्षा करता है:

ॐ ह्लीं पूर्वतः पातु | दक्षिणे रक्षतु ह्लीं | पश्चिमे पातु बगला | उत्तरे स्तम्भिनी सदा ॥ ऊर्ध्वे पातु महाविद्या | अधः पातु हरिप्रिया | सर्वतः पातु सा देवी | ह्लीं बगला महेश्वरी ॥

तत्पश्चात स्तुति करें:

सर्वदुष्टं विनाशय | शत्रुवर्गं विनाशय | मम कार्यं सिद्धय | मम मनोरथं पूरय ॥ जय बगले महाविद्ये | जय पीताम्बरे शिवे | शत्रुनाशकरे देवि | ह्लीं ह्लीं ह्लीं नमोस्तुते ॥

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अष्टम भाग — विसर्जन एवं समाप्ति

पूजा सम्पन्न होने के बाद, क्षमा प्रार्थना करें कि हे माँ! यदि मुझसे कोई भूल हुई हो तो क्षमा करें:

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् । पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥ मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि । यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे ॥

फिर निम्न मन्त्र बोलकर देवी को उनके परम धाम में विसर्जित करें (मानसिक रूप से):

ॐ गच्छ गच्छ परं स्थानम् स्वस्थाने परमेश्वरि । यत्र ब्रह्मादयो देवाः तत्र गच्छ ह्लीं नमः ॥

विसर्जन के बाद माँ को मन ही मन प्रणाम करें और भोग का प्रसाद सपरिवार ग्रहण करें।

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नवम भाग — विशेष नियम एवं फलश्रुति

क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
पूजा में पीले वस्त्र धारण करेंकाले या सफेद वस्त्र न पहनें
ब्रह्मचर्य का पालन करेंमांस-मदिरा का सेवन न करें
नित्य स्नान के बाद ही पूजा करेंअशुद्ध अवस्था में पूजा न करें
एकाग्र मन से मन्त्र जाप करेंजाप के बीच में न उठें

फलश्रुति: इस विधि से नियमित पूजन करने से माँ बगलामुखी की कृपा सदा बनी रहती है। शत्रु पर विजय, न्यायालय में सफलता, वाक् सिद्धि, एवं समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

॥ ॐ ह्लीं बगलामुखि नमः ॥

जय माँ पीताम्बरा — जय माँ बगलामुखी

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