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बगलामुखी कीलक स्तोत्र

(शत्रु स्तम्भन एवं कीलन हेतु)

प्रस्तावना

माँ बगलामुखी का यह कीलक स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली है। इसके नियमित पाठ से शत्रुओं की बुद्धि, वाणी और कर्मों का पूरी तरह कीलन (बंधन) हो जाता है।

ध्यानम्

विनियोग ॐ अस्य श्रीबगलामुखीकीलकस्तोत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः। गायत्री छन्दः। श्रीबगलामुखी देवता। ह्लीं बीजम्। सर्वदुष्टस्तम्भनार्थे जपे विनियोगः॥

1

ॐ ह्लीं बगले! विद्महे स्तम्भिनि! धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

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2

कीलकं शृणु देवेशि! यत्त्वया प्रोक्तमादितः। शत्रूणां स्तम्भनं देवि! कीलकेन विमुच्यते॥

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3

वाक्स्तम्भनं च मनसः स्तम्भनं च करोति या। बुद्धिस्तम्भकरी देवी सा मे कीलकमुद्धरेत्॥

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4

ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगलामुखि! सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय। बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥

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फलश्रुतिः

इति कीलकं सम्पूर्णम्।

स्रोत: रुद्र यामल तन्त्र | मन्दिर प्रामाणिक पाठ

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