माँ बगलामुखी कौन हैं? — मूल परिचय

माँ बगलामुखी हिंदू तंत्र में दस महाविद्याओं — आदि शक्ति की दस महान ब्रह्मांडीय ज्ञान-स्वरूपाओं — में से आठवीं हैं। वे दैवीय स्तम्भन की देवी हैं — शत्रुओं को मौन करने, काले जादू को रोकने और असत्य को नष्ट करने की शक्ति उनमें निहित है। उनकी उपासना कानूनी विवादों में विजय, शत्रुओं से सुरक्षा और बाधाओं के निवारण के लिए की जाती है।

उनके नाम में गहरा अर्थ छिपा है। "बगला" संस्कृत शब्द "वल्गा" का रूपांतरण है, जिसका अर्थ है लगाम या नियंत्रण। "मुखी" का अर्थ है "जिसका मुख हो" या "जो प्रमुख हो।" इस प्रकार बगलामुखी का अर्थ है — वह देवी जो लगाम थामती हैं, जो समस्त शक्तियों को अपनी इच्छानुसार नियंत्रित और रोक सकती हैं।

उनकी विशेष पूजा हिमाचल प्रदेश, दतिया (मध्य प्रदेश) और नागपुर में होती है। मंगलवार को और बगलामुखी जयंती पर उनकी उपासना सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। उनका मूल मंत्र — जो बीज "ह्लीं" से आरंभ होता है — समस्त तांत्रिक परंपरा में सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है।